वंदे मातरम के 150 साल पर संसद में बहस, मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया से तेज़ हुई सियासी गर्मी
भारत/दिल्ली:-
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में चल रही बहस लगातार तीखी होती जा रही है। मंगलवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर जोरदार वार-पलटवार देखने को मिला। अब इस विवाद में मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद सियासी हलचल और बढ़ गई है।

जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने बयान दिया कि मुसलमानों के लिए शरीक अस्वीकार है। उन्होंने कहा कि “किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करता है और उसमें किसी को शरीक नहीं कर सकता।” मदनी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और सोशल मीडिया पर भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
मौलाना अरशद मदनी लंबे समय से मुस्लिम समाज के प्रमुख नेताओं में शुमार किए जाते हैं। वह जमीअत उलमा-ए-हिंद (अरशद गुट) के अध्यक्ष हैं और दारुल उलूम देवबंद में हदीस के प्रोफेसर भी हैं। 2006 में अपने बड़े भाई मौलाना असद मदनी के निधन के बाद उन्होंने संगठन की कमान संभाली।