सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था पर भड़के विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर, नवजात को जमीन पर देख भड़के, कहा – “इस मुद्दे को सदन में उठाऊंगा”

सदर अस्पताल की लचर व्यवस्था पर भड़के विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर, नवजात को जमीन पर देख भड़के, कहा – “इस मुद्दे को सदन में 

मधुबनी, 13 जुलाई 2025 –

सदर अस्पताल, मधुबनी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन शनिवार को उस समय स्थिति और गंभीर हो गई जब कई शिकायतें मिलने के बाद अचानक निरीक्षण पर पहुंचे बिहार विधान परिषद सदस्य सह बीजेपी नेता घनश्याम ठाकुर ने स्त्री एवं प्रसूति विभाग की हालत देख खुद को नाराज़गी से रोक नहीं पाए।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि एक नवजात शिशु को ज़मीन पर रख दिया गया है। यह दृश्य देखकर वे बेहद क्रोधित हो उठे और तत्काल मौके पर मौजूद एक नर्स से इसका कारण पूछा। जब उन्होंने नर्स से उसका नाम पूछा तो वह उल्टे तेवर में जवाब देते हुए बोली, “बोर्ड पर देख लीजिए।” हालाँकि सूत्रों के मुताबिक नर्स का नाम किरण कुमारी बताया जा रहा है। इस व्यवहार से नाराज होकर श्री ठाकुर ने सीधे सिविल सर्जन को फोन कर शिकायत की और तीखा सवाल उठाते हुए कहा,

“अगर हमारे साथ ये कर्मचारी इस तरह से बात कर रहे हैं तो फिर आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होता होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।”

उन्होंने सिविल सर्जन को अस्पताल व्यवस्था को तत्काल सुदृढ़ करने का निर्देश देते हुए चेताया कि वे इस गंभीर मामले को विधान परिषद में उठाएंगे और सरकार का ध्यान इस ओर खींचेंगे।

मरीजों ने भी सुनाई पीड़ा:-

निरीक्षण के दौरान वहां उपस्थित कई मरीजों और उनके परिजनों ने भी एमएलसी से शिकायतें कीं। एक महिला ने कहा,

“मेरा मरीज़ दर्द से कराह रहा है, लेकिन न कोई नर्स आ रही है, न डॉक्टर। बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

वहीं, एक अन्य परिजन ने कहा, “यहां अगर हम कुछ कह देते हैं तो हमें डांट दिया जाता है, चिल्ला कर भगा दिया जाता है।”

व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल:-

घनश्याम ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की लापरवाही और अमानवीय व्यवहार अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि जब अस्पतालों की यही स्थिति होगी तो फिर गरीब जनता इलाज के लिए कहाँ जाएगी?

उन्होंने यह भी कहा कि सदर अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण केंद्र पर ऐसी स्थिति यह दर्शाती है कि प्रशासनिक निगरानी कमजोर है, और यह जनता के स्वास्थ्य अधिकारों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने अधिकारियों से तत्काल स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा और चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

प्रशासन की जिम्मेदारी तय होगी:-

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन पर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे इस गंभीर निरीक्षण के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगे या फिर यह मामला भी पहले की तरह कागजों में ही दब जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकारी दावों की पोल खोल दी है, और यह साफ संकेत दिया है कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो आम जनता का आक्रोश और नेताओं का हस्तक्षेप और तेज हो सकता है।

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