मधुबनी में INDIA गठबंधन का चक्का जाम, मतदाता पुनरीक्षण और श्रमिक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

मधुबनी, 9 जुलाई 2025
बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान और केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में बुधवार को मधुबनी में इंडिया गठबंधन के नेतृत्व में व्यापक चक्का जाम और प्रतिरोध मार्च आयोजित किया गया। इस आंदोलन में राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले, सीपीआई, माकपा और वीआईपी पार्टी सहित विपक्षी दलों के हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व राजद जिला अध्यक्ष सह पूर्व विधायक रामाशीष यादव, पूर्व मंत्री समीर कुमार महासेठ, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुबोध मंडल, भाकपा-माले के जिला सचिव ध्रुवनारायण कर्ण, सीपीआई के मिथिलेश झा, माकपा के मनोज यादव, वीआईपी पार्टी के विष्णुदेव चौधरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने किया। सुबह 7 बजे प्रदर्शनकारियों ने मधुबनी रेलवे स्टेशन पहुंचकर शहीद एक्सप्रेस को रोका और स्टेशन के सामने सड़क पर जाम लगाकर जोरदार नारेबाजी की।
गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा 30 जून से 25 जुलाई तक चलाया जा रहा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एनडीए सरकार के दबाव में चल रहा है, जिसका उद्देश्य दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, अल्पसंख्यक और गरीब तबके के मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।
भोलू यादव ने चेतावनी दी कि अगर आम लोगों की मांगों पर सरकार ने विचार नहीं किया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। विरोध मार्च रेलवे स्टेशन से निकलकर जिला मुख्यालय तक पहुंचा, जहां दोनों मुख्य गेट पर सड़कों को जाम कर दिया गया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।

इस प्रदर्शन को देशव्यापी ट्रेड यूनियन हड़ताल का भी समर्थन प्राप्त था। ट्रेड यूनियनों ने 25 करोड़ श्रमिकों के साथ भारत बंद का आह्वान किया था। बैंकों, बीमा दफ्तरों और कोयला खदानों सहित कई क्षेत्रों में कामकाज ठप रहा। बिहार में विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ भी चक्का जाम की घोषणा की थी।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेताओं में मनोज यादव, राजेंद्र यादव, विष्णुदेव सिंह यादव, पवन यादव, शंभु यादव, अरबिंद पासवान, मालती देवी, शैनी शाह, मो. ईमरान, मोतीलाल शर्मा, रामजी यादव, संजय सहनी, बेचू नारायण सहनी, तपेश्वर सहनी, राधाकृष्ण कामत सहित सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
इंडिया गठबंधन का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। यदि मतदाता सूची में मनमानी छंटनी बंद नहीं हुई, तो राज्यव्यापी जनआंदोलन की घोषणा की जाएगी।