नगर निगम मधुबनी में करोड़ों की खरीद में घोटाला, सरकारी राजस्व की हुई क्षति और बरती गई कई अनियमितता,जांच की मांग तेज

नगर निगम मधुबनी में करोड़ों की खरीद में घोटाला, सरकारी राजस्व की हुई क्षति और बरती गई कई अनियमितता,जांच की मांग तेज

नैशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट भेंडर्स ऑफ इंडिया (नासवि) ने मधुबनी नगर निगम सरकार पर लगाया कई आरोप 

मधुबनी, बिहार:-

नगर निगम मधुबनी में बीते तीन वर्षों (2022-2025) के भीतर सामग्रियों की खरीदारी में भारी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन नासवि ने आज गिलेशन बाजार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (संगठन) राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, पर न तो शहर की साफ-सफाई में कोई उल्लेखनीय सुधार आया, न ही खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक उपयोगी साबित हो सकीं ।

सूत्रों के अनुसार, पहले स्टील की कचरा पेटियां लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गईं, लेकिन वे दो महीने भी नहीं टिक सकीं। इसके बावजूद, बाद में प्लास्टिक की पेटियों के नाम पर दोबारा लाखों की निकासी कर दी गई। इसी तरह, डिवाटरिंग मशीन, फॉगिंग मशीन, स्प्रिंकल मशीन, पंपसेट आदि उपकरणों की खरीद में भी अनियमितता की बात सामने आई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि नगर निगम ने जिन निजी सफाई एजेंसियों को कार्यभार सौंपा, उनके पास पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी नहीं थे। ई-रिक्शा, हाथ ठेले और अन्य उपकरण निगम द्वारा ही दिए गए, जो निविदा शर्तों के उल्लंघन का स्पष्ट प्रमाण है।

नगर निगम द्वारा खरीदे गए ई-रिक्शा और टीपर की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि 60% वाहन एक साल के अंदर ही खराब हो गए। कई ठेले और हाथ रिक्शा आज भी बेकार पड़े हुए हैं। कुछ तो ऐसे उपकरण हैं, जिनका कभी उपयोग ही नहीं हुआ।

विजय घनश्याम ने कहा कि निगम में पोखर के सौन्दर्यीकरण के लिए लाखों रुपया आया हुआ है लेकिन एक भी पोखर का सौन्दर्यीकरण नहीं हुआ है। अभी गर्मी है हर तरफ पानी का हाहाकार मचा हुआ लेकिन निगम के तरफ से कोई व्यव्स्था नहीं है हालाँकि कुछ दिन पहले एक प्याऊ समाहरणालय के सामने लगाया गया था लेकिन आज कहीं नहीं दिखाई दे रहा है । मौजूदा सरकार पूरे मधुबनी नगर निगम में विफल है। मैं तमाम बिंदु को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी साहब से मिलूंगा।

स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब जनता को शुद्ध पानी, सफाई, और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तब इस प्रकार की वित्तीय लापरवाही जनता के विश्वास के साथ धोखा है। अगर समय रहते इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गहरे सवाल उठेंगे।

मौके पर राजेंद्र राय, विजय घनश्याम, महादेव साह,दिलीप राम,जूगेश्वर साह ,विनोद कुमार,कुशेश्वर साह,राकेश महासेठ,किशोर कुमार और कई लोग थे।

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