*मधुबनी में भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व भाई दूज मनाया गया। बहन ने भाई की लंबी उम्र की कामना की।
रिपोर्ट -नीतीश झा
Madhubani/ Bihar:-

मधुबनी में भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक भ्रदूतिया (भाईदूज) पर्व आज मिथिला मधुबनी में धूम धाम से मनाया गया।इस दिन भाई अपने बहन के घर जाते हैं। बहन भाई को विशेष पूजा कर मिठाई खिलाती हैं। यह पर्व यमराज और यमुन के प्रेम की कथा को दर्शाता हैं। मिथिला एवं मिथिला संस्कृतिक से जुड़े लोग देश के जिस हिस्से में रहते हैं वहां इस पर्व को बड़े ही आस्था के साथ मनाते हैं। कहा जाता है कि भाई इस दिन कहीं भी हो पर अपनी बहन से नौत लेने जरूर जाते हैं। बहन को भी भाई के आने का इंतजार रहता है।
ऐसे मनाया जाता है त्योहार
इस दिन बहन आंगन में अरिपन करती हैं। लकड़ी के पीढ़ी पर भाई को बिठाया जाता है। पिठार और सिंदुर का तिलक लगाया जाता है। भाई के हाथ में बहन पिठार एवं सिंदूर लगाती है तथा पान , सुपारी,कोहरा का फूल, द्रव्य, अंकुरित चना हाथ में रखकर भाई के हाथ में गंगाजल डालते हए पंक्ति का उच्चारण करती है की गंगा नतै छैथ जमुना के हम नेतै छी भाई के जाहिना जाहिना गंगा जमुना के धार बहय हमर भाई सबहक औरदा बढ़य। यह कहते हुए भाई के दीर्घायु जीवन की कामना करती है भाई अपने सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार स्वरूप कुछ न कुछ भेंट करता है। इसके बाद बहन भाई का मधुर मिष्ठान से मुंह मीठा कराती हैं।

पर्व के पीछे यह कथा है प्रचलित-कथा प्रचलित है कि यमराज की बहन यमुना थी। यमुना ने अपने भाई को कई बार अपने घर आने का निमंत्रण भेजा परंतु वह नहीं आ पा रहे थे। आखिरकार एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के यहां पहुंच गए। वह दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। यमुना ने अपने भाई के आगमन पर खूब सत्कार किया। यमराज ने प्रसन्न हो कर अपनी बहन यमुना से वर मांगने को कहा। बहन यमुना ने अपने भाई यमराज से वर मांगा की जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएंगे, उनका अकाल मृत्यु नहीं होगा तथा मरणोपरांत भी नरक वास नहीं होगा। उसी दिन से इस दिन को भरदुतिया के रूप में मनाया जाने लगा ।
