*आज यानी बुधवार को मनाया जाएगा मिथिला का प्रमुख कोजगरा त्योहार, मिथिला में पान, मखाना बांटने की है परंपरा
*नीतीश झा*
Mithila/Bihar:-

आपकों बताते चले कि शरद पूर्णिमा के दिन कोजागरा त्योहार भी होता है। ये बंगाल और मिथिला का एक पारंपरिक त्योहार है। इसमें मखाने बांटे जाते हैं और इससे कई चीजें बनाई जाती हैं। कोजगरा त्योहार बंगाल और बिहार का एक बड़ा त्योहार है। इस बार कोजागरा का त्योहार 16 अक्टूबर 2024 यानी बुधवार को होने जा रहा हैं । ये त्योहार काफी खास माना जाता है क्योंकि इस दिन गृहलक्ष्मी की पूजा होती है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी की पूजन के साथ घर आई नई बहू की भी पूजा करते हैं और नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हैं। इस त्योहार में मखाने का अपना खास महत्व है और इससे कई सारी चीजें बनाई जाती हैं। तो आइए जानते हैं इस त्योहार से जुड़ी छोटी-बड़ी बातें विस्तार से।
कोजगरा पूजा पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और बिहार का लोकत्योहार है। दरअसल, इस त्योहार के पीछे मान्यता ये है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन लोग व्रत करते हैं और फिर माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस दौरान माता लक्ष्मी के अन्नपूर्णा रूप की पूजा होती है और लोग अपने घर की नई बहू की भी पूजा करते हैं और परिवार नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देता है।
मैथिली समाज के लोग भी काफ़ी धूमधाम से मनाते है, कोजागरा । जिसे ग्रामीणों क्षेत्रों में पान, मखान खाने का दिन भी कहते हैं। कोजगरा शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा के दिन यह मनाया जाता है। पंडितों के अनुसार पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चन्द्रमां सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इस दिन मैथिली समाज क़े नव विवाहितों के लिए खास होता है। इस वर्ष हुए नए शादी वाले दूल्हे के घर दुल्हन के घर से पान, मखान, मिठाई, दही सहित अन्य सामान का भार आता है। लोगों की माने तो यह रामायण काल से ही चला आ रहा है। मां जानकी यानी माता सीता के यहां से अयोध्या प्रभु श्री राम के यहां कोजगरा का भार सर्वप्रथम गया था। तब से यह परम्परा मनाया जा रहा है।