*गोई मिश्र लगमा ग्राम में अयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ
*यह कथा लगमा गांव निवासी इंद्र कुमार झा एवं रेखा देवी के सौजन्य से अयोजित किया गया था ।
Darbhanga:-
कथावाचक पंडित राधेश्याम झा और उनकी संगीत टोली द्वारा मधुर संगीत से श्रीमद् भागवत कथा प्रेमी तथा सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वाले महिला पुरुष बालक बालिका सभी के मन को झंकृत करता रहा।

भगवान श्री कृष्ण के जन्म और उनके द्वारा बाल्य काल में किए गए क्रियाकलापों से जहां बच्चों के मन में भगवान श्री कृष्ण के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हुआ वही गोवर्धन धारण करना और राष्ट्र के लिए ,मानवता के लिए विनाशकारी बुद्धि रखने वाले कंस के वध की कथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री कृष्ण की भक्ति में श्रद्धा के साथ आसुरी शक्ति के विनाश हेतु श्री कृष्ण के चरित्र में स्वयं को समाहित कर लिया। कथावाचक पंडित राधेश्याम झा ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को आज के युग के लिए निर्णय कारी बताते हुए कहा की होठों पे कभी मुरली ,कभी गैया चराने के लिए हाथों में छड़ी तो जरूरत पड़ने पर सुदर्शन चक्र धारण करने की क्षमता रख कर ही कोई भारत माता कि भव्यता को सुरक्षित रख सकता है।
उन्होंने कहा कि अनादि काल से भारतवर्ष सनातन साधकों का देश रहा है परंतु पूर्व में हमारी निष्क्रियता ने हमारे अनेक धर्म संस्थान ,विद्या के केंद्र बिंदु के स्थान एवं महापुरुषों के अपमान को सहन करने का दंश झेला है। उन्होंने माता-पिता के साथ उपस्थित युवा पीढ़ी से आह्वान किया भारत तभी भव्य होगा जब घर-घर में माता-पिता की पूजा होगी जब तक भारत में वृद्धाश्रम बने रहेंगे अनाथ आश्रम बने रहेंगे तो हमारी कायरता की कथा कहते रहेंगे।
युवा पीढ़ी गांठ बांध ले कि जिस घर में बड़ों का सम्मान नहीं उस घर से लक्ष्मी और सरस्वती के साथ माता दुर्गा एवं बजरंगबली सभी उस स्थान को छोड़ देते हैं । राष्ट्रभक्ति सबसे बड़ी पूजा है और ईश्वर में आस्था हमारा उच्च संस्कार दर्शाता है जो हमें जीवन के पथ पर अनीति के राह पर चलने से हमें रोकता है।

इस कार्यक्रम में सी ए रोशन झा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवा कार्यकर्ता इंजीनियर सोनू झा ,भूषण झा ,संतोष झा , मंत्रेश्वर झा, आदित्य झा ,आशीष राय ,संजना राय ,बद्री नारायण झा ,आयुष झा, ललित झा सहित अनेक धर्म अनुरागी बंधुओ ने सहयोग प्रदान किया और सातों दिन के कथा वाचन के कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न किया।