जुड़शीतल के अवसर पर खेला जाता है खुनियां खेल

जुड़शीतल के अवसर पर खेला जाता है खुनियां खेल

इस खेल में पत्थर बाजी,भाला, बरछी, जहरीली तीर, जैसे अन्य खतरनाक हथियार भी किया जाता है इस्तेमाल

सदर अनुमंडल पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि इस तरह के खेल में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह के अनहोनी को रोका जा सके।

Report:- Firoz Alam

Madhubani:-

मधुबनी जिला मुख्यालय से सटे रहिका ,राजनगर , कलुआही
क्षेत्र के मध्य नाजिरपुर डोकहर , शिविपट्टी, बेलहवार, बेलाही अमादा और हरिनगर के मध्य मे जुड़शीतल के दिन सौ साल पुराना अंधबिस्वास का खेल परंपरा को अभी तक निमाहा जा रहा है । प्रशासन का कोई भी प्रयास इस खेल को रोक नही पाया । खेल स्थल से पूरब दिशा में शिविपट्टी, बेलहवार्, रशीदपुर, पहिहारपुर , बल्हा सहित राजनगर और खजौली थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग एक तरफ़ रहते हैं और पश्चिम दिशा मे बहरवन- बेलाही, नाजीरपुर, कनैल सहित कलुआही, रहिका और बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग एक तरफ़ रहते हैं । जैसे की महाभारत का रण क्षेत्र हो। इसको खुनिया लड़ाई भी कही जा सकती है। इस लड़ाई खेल का एक विशेषता रह चुका है ! इस लड़ाई मे खून होने के बाद भी आज इस लड़ाई को लेकर भविष्य में कोई रंजिश नहीं रहा। जैसे कि सुनने में आता है कि पूर्वज से इस रिवाज को मनाते आ रहे हैं और मानना है कि इस खेल मे बसिया भात और बड़ी खा कर लोग मार करने जाते है । पहिले यह खेल लगभग एक महीना तक लागातार चलता था पंरतु कुछ वर्षों से लोगों को रुचि कम होंने के कारण दो से तीन दिन तक मात्र यह लड़ाई होती है ।

चार चार थाना कि प्रशासन मुख दर्शक बने रहते हैं । इस खेल मे पूर्व मे कुछ लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है और कई लोग अपंग भी हो चुके हैं । समाचार लिखने तक इस वर्ष कोई खास घटना घटने की सूचना नहीं प्राप्त है। उक्त सूचना कलुआही प्रखण्ड क्षेत्र के मधेपुर पंचायत के पूर्व मुखिया अजय कुमार झा नाजिरपुर के पूर्व मुखिया मोहम्मद साबिर, पंडित उदय चंद्र पांडे, पंडित विष्णु देव पांडे और जय श्री दिल ने दी है। वहीं दूसरी तरफ उसी दिन कलुआही थाना क्षेत्र अन्तर्गत बेलाही ग्राम में अभी भी जूईर शीतल के मौके पर पूर्वज से आ रहे परंपरा को धरोहर के रूप में मनाते हैं। बता दें कि जुईर शीतल के धुरखेल के दिन पहलवानी का आजमाइश होता आ रहा है। इस मौके पर ध्वजा गाड़ कर पूजा पाठ कर अखाड़ा बना कर ढोल बाजा के साथ पहलवान की जोड़ी मिलाकर अपने शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। इस कुस्ती आखारे पर कुस्ती होने के बाद लोग इस अखाड़े का मिट्टी का टीका लगाकर अपने शरीर के स्वस्थ होने का कामना करते हैं। वहीं सदर अनुमंडल पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि इस मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है किसी भी तरह के अनहोनी की घटना ना घटे ।

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