केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: मनरेगा अब “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना”, 125 दिन की नौकरी
भारत:-
केंद्र सरकार ने आज ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मनरेगा का नाम बदलकर “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” कर दिया। इसी के साथ सरकार ने रोजगार गारंटी के दिनों को बढ़ाकर 125 करने और मजदूरी को संशोधित कर 240 रुपये प्रतिदिन करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया। इस बदलाव को लागू करने के लिए सरकार 1.51 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित करने जा रही है। यह निर्णय उन करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो मनरेगा आधारित मजदूरी पर निर्भर होकर अपने घर-परिवार चलाते थे।

नई योजना का उद्देश्य मनरेगा को और मजबूत बनाना तथा बेरोजगार ग्रामीण मजदूरों को अतिरिक्त कार्यदिवस देकर उनकी आय में स्थिरता और वृद्धि करना है। अब तक मनरेगा के तहत ग्रामीणों को हर वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण वर्ग की आर्थिक मजबूती और आजीविका सुरक्षा को बल मिलेगा।
मनरेगा से पूज्य बापू योजना तक – क्या बदला?
मनरेगा, जिसे 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के रूप में शुरू किया गया था, का मकसद ग्रामीण रोजगार को सुरक्षित करना और ग्रामीण विकास के कार्यों को गति देना था। बाद में इसका नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) किया गया। अब इसे फिर से महात्मा गांधी के नाम से जोड़ते हुए “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” का नया रूप दिया गया है।
यह योजना न केवल ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराती है, बल्कि जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, बागवानी, नहरों की मरम्मत और सामुदायिक विकास जैसे श्रमप्रधान कार्यों को बढ़ावा देकर पूरे ग्रामीण ढांचे को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
125 दिन का रोजगार: ग्रामीण मजदूरों को बड़ी मदद
सरकार के इस फैसले से मजदूरों को अब 25 अतिरिक्त दिन का रोजगार मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां खेती के मौसम के अलावा रोजगार के अवसर सीमित होते हैं, वहीं इस योजना के तहत बढ़े हुए कार्यदिवस मजदूरों को साल भर आर्थिक सुरक्षा देंगे। बढ़ी हुई मजदूरी 240 रुपये प्रतिदिन भी ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करेगी।
सरकार का दावा – ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
सरकार का कहना है कि इस योजना के नए स्वरूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी, पलायन कम होगा और महिलाएं भी अधिक संख्या में कार्यस्थलों पर जुड़ेंगी। मनरेगा के शुरुआती वर्षों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी थी, और नई गारंटी से यह संख्या और आगे बढ़ने की उम्मीद है।