Writer- Nitish Jha
देव उठनी एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा
हिन्दु धर्म ग्रन्थों में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। यह व्रत फलदायी व्रत के रूप में वर्णित किया गया है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। हर महीने एकादशी व्रत किया जाता है, लेकिन कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी व्रत का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस व्रत को करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल देवउठनी एकादशी का व्रत बीते दिनों 12 नवंबर को मनाया गया। इस दिन ही भगवान विष्णू क्षीर निद्रा से जागते हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा की जाती है। इस एकादशी व्रत की विधि अन्य एकादशी से थोड़ी अलग होती है।
देव उठान एकादशी में व्रत कर रहे नीतीश झा बताते हैं कि
व्रत का महत्व धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही रूपों में है:
धार्मिक महत्व कि बात करें तो सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्व है. व्रत रखने से भगवान के प्रति श्रद्धा, भक्ति, और समर्पण का भाव आता है. व्रत से मन, दिमाग, और आत्मा शुद्ध होती है. व्रत से पापों और कष्टों से मुक्ति मिलती है. व्रत से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. वहीं वैज्ञानिक महत्व के बारे में उन्होंने कहा कि व्रत करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. व्रत करने से पेट और पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. व्रत करने से अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल बढ़ता है और खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है. व्रत से मोटापा कम करने में मदद मिलती है. व्रत से शरीर में मेटाबॉलिज्म स्लो होता है, जिससे शरीर को सफ़ाई करने का समय मिलता है. व्रत से शरीर फ़िज़िकली और मेंटली दोनों तरीकों से रिलैक्स होता है.
पूजा के दौरान चुन्नू झा ,भगवान जी झा, स्वाति कुमारी, अंजू कुमारी, चांदनी कुमारी एवं अन्य की की उपस्थिति देखी गई।
*नीतीश झा कि रिपोर्ट*