एएनएम व जीएनएम को परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत दिया गया प्रशिक्षण

•सदर अस्पताल  में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित
•आईयूसीडी, पीपीआईयूसीडी का दिया गया प्रशिक्षण

Madhubani:-  जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गुरुवार को पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन सदर अस्पताल में किया गया। प्रशिक्षण 26 जून से शुरू होकर 30 जून तक संचालित होगा। क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई  के निर्देश के आलोक में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत आईयूसीडी, पीपीआईयूसीडी, विषय पर प्रशिक्षण डॉ. नीतू व लेबर रूम इंचार्ज माधुरी कुमारी के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण में एएनएम व जीएनएम को परिवार नियोजन कार्यक्रम से संबंधित जानकारी दी गई। दरभंगा प्रमंडल के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा ने बताया गर्भपात के पश्चात प्रत्येक महिला को उपलब्ध परिवार नियोजन साधनों में उसकी इच्छानुसार लगभग सभी प्रकार के साधन प्रदान किये जा सकते हैं। कुछ साधनों के उपयोग में प्रशिक्षित सेवा प्रदाता की विशेष तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है। आईयूसीडी, पीएआईयूसीडी प्रशिक्षित सेवा प्रदाता ही लगा सकता है। इसलिए उन्मुखीकरण करना अतिआवश्यक है।

आईयूसीडी लगाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा:


स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू ने कहा कि प्रशिक्षण में शामिल कर्मियों को परिवार नियोजन के लिए अपनाए जाने वाली विधि पीपीआईयूसीडी की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के लिए आईयूसीडी सबसे उपयुक्त माध्यम है। चिकित्सक व कर्मी महिलाओं को दो बच्चों के बीच दो या दो से अधिक वर्ष के अंतर के लिए आईयूसीडी का प्रयोग करने की जानकारी दें। प्रशिक्षण में कर्मियों को इससे होने वाले लाभ व लगाने के दौराने बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया गया। प्रसव कक्ष इंचार्ज माधुरी कुमारी ने कहा आईयूसीडी लगाने के बाद महिलाओं के शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। महिलाएं ऑपरेशन के नाम पर बंध्याकरण से डरती हैं, उनके लिए आईयूसीडी बेहतर विकल्प है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद सभी एएनएम व जीएनएम अपने-अपने स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर महिलाओं को जागरूक करेंगी।

अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है आईयूसीडी से:
प्रसव के 48 घंटे के अंदर पीपीआईयूसीडी, गर्भ समापन के बाद पीएआईयूसीडी व कभी भी आईयूसीडी को किसी सरकारी अस्पताल में लगवाया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से जहां अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है तो इसके इस्तेमाल से सेहत को कोई नुकसान नहीं ।

क्या है पीपीआईयूसीडी:
पोस्ट पार्टम इंट्रा यूटाराइन कांट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी)। यह उस गर्भ निरोधक विधि का  नाम है। जिसके जरिए बच्चों में सुरक्षित अंतर रखने में मदद मिलती है। प्रसव के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली यह विधि सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है। प्रसव के बाद अस्पताल से छ़ुट्टी मिलने से पहले ही यह डिवाइस (कॉपर टी) लगवाई जा सकती है। इसके अलावा माहवारी या गर्भपात के बाद भी डाक्टर की सलाह से इसे  लगवाया जा सकता है। एक बार लगवाने के बाद  इसका असर पांच से दस वर्षों तक रहता है। यह बच्चों में अंतर रखने की लंबी अवधि की एक विधि है। इसमें गर्भाशय में एक छोटा उपकरण लगाया जाता है।

केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी लगा सकता है आईयूसीडी:
यह दो प्रकार के होते हैं। कॉपर आईयूसीडी 380ए,  इसका  असर दस वर्षों तक रहता है। दूसरी कॉपर  आईयूसीडी  375 इसका असर  पांच वर्षों तक रहता है। ध्यान रहे, केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा ही एक छोटी सी जांच के बाद इसे लगवाया जा सकता है। जब भी दंपत्ति बच्चा चाहें, अस्पताल जाकर इसे निकलवा सकते हैं।

मौके पर क्षेत्रीय लेखा प्रबंधक विकास रोशन, प्रसव कक्षा इंचार्ज माधुरी कुमारी साहित एएनएम व जीएनएम उपस्थित थे.

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