मिथिला महोत्सव में सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र की कलाकृति बनी मुख्य आकर्षण, डीएम ने की सराहना

*मिथिला महोत्सव में सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र की कलाकृति बनी मुख्यआकर्षण, डीएम ने की सराहना

*सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने युवा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए रेत पर बनाई कलाकृति

*शत प्रतिशत मतदान को लेकर सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने रेत पर उकेरी कलाकृति, डीएम ने की सराहना

नितीश झा की कलम से✒️

मधुबनी:

रेतकला के महान कलाकार मधुरेंद्र कुमार जो कि हर खास मौकों पर रेत से अपनी कलाकृति बनाने को लेकर दुनियाभर में मशहूर हैं। इस वर्ष देश के सभी मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने अपनी कलाकृति बनाकर “मेरा पहला वोट देश के लिए” का संदेश दिया हैं। बता दें कि मिथिला के पावन धरती पर दो दिवसीय मिथिला महोत्सव सह बिहार दिवस के आयोजन अवसर पर पूर्वी चंपारण जिले के सिकराहना अनुमंडल अन्तर्गत घोड़ासहन बनकटवा प्रखंड के बिजबनी गांव निवासी रेतकला के महानायक मशहूर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र कुमार ने मधुबनी जिले में शत प्रतिशत मतदान को लेकर वाटसन स्कूल परिसर में जिला प्रशासन मधुबनी के अनोखी पहल पर दो दिनों के कठिन मेहनत के बाद बुधवार को मुख्य मंच के ठीक सामने में रखें एक ट्रक बालू पर 10 फीट ऊंची “मेरा पहला वोट देश के लिए” स्लोगन के साथ भारत का नक्शा और देशहित में अपनी वोट देकर अपनी खुशी जाहिर करती महिला की मनमोहक कलाकृति उकेरी है। रेत से बनी यह कलाकृति इतना मनमोहक की इस सैंड आर्ट को देख अभिभूत हुए मधुबनी डीएम अरविंद वर्मा ने मधुरेंद्र को विशेष रूप से बधाई दी। यह आकर्षण का केन्द्र बना हैं। महोत्सव देखने आ रहे लोग अपने सेलफोन में मधुरेंद्र की कलाकृति के साथ सेल्फी भी ले रहे है। मौके पर उपस्थित सदर एसडीओ अश्वनी कुमार समेत सभी वरीय पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों ने मधुरेंद्र की कला का प्रशंशा करते बधाई दी।
बता दें कि भारत की कला संस्कृति को विदेश में पहचान दिलाने वाले बिहार के मिट्टी में उपजे अंतरराष्ट्रीय रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार का सैंड आर्ट जिसे देख हर कोई मोहित हो जाता हैं। कहा गया हैं कि “जहां चाह हैं, वही राह” हैं। इसको चरितार्थ करते हैं मधुरेन्द्र। इनमें त्याग और समर्पण इतना कि दिन-रात कठिन परिश्रम कर चाहे चिलचिलाती धूप हो या कपकपाती ठंड का कहर, हर मौसम में भी एक ठोस पहाड़ की भांति अडिग रह अपनी कला साधना में लीन रहतें हैं। और अपनी बेमिसाल कलाकारी का बेहतरीन नमूना पेश कर आये दिन देश- दुनियां को को नया पैगाम देने में जुटे रहतें हैं। जब इनकी अंगुलियों की जादू चलती हैं तो रेत भी बोल उठती हैं।

गौरतलब हो कि सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार बिहार लोकसभा चुनाव 2019, बिहार विधानसभा 2020 और स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 के ब्रांड एंबेसडर सहित इंटरनेशनल सैंड फेस्टिकल के विजेता भी हैं। मधुरेंद्र पिछले 25 सालों से सैंड आर्ट बना रहे हैं। उनकी कई रेत की मूर्तियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। इंटरनेशल सैंड आर्ट विजेता रेत कलाकार मधुरेंद्र ने दुनियां भर में 12 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय रेत कला प्रतियोगिताओं और उत्सवों में भाग लिया है और देश के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र अंतराष्ट्रीय सैंड आर्ट अवार्ड 2019 के विजेता हैं और राष्ट्रपति सम्मान, बिहार रत्न, राज्यस्तरीय युवा पुरस्कार समेत दर्जनों राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर के अवार्ड जीत कर हिंदुस्तान का मान बढ़ाया हैं।

*नए साल में मधुरेंद्र ने बनायी दुनिया की सबसे बड़ी रेत कलाकृति

बिहार के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने रेत पर लाल किला की कलाकृति बनाने के लिए 5 ट्रक बालू का प्रयोग किया। विश्व प्रसिद्ध रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने नया साल 2023 के अवसर पर मुंगेर के माधोपुर काठ पुल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में लाल किले की रेत की मूर्ति बनाई। 20 फीट ऊंची और 40 फीट चौड़ी लाल किला को बनाने के लिए सैंड आर्टिस्ट ने लगभग 1 टन बालू का उपयोग किया। कुमार ने दावा किया कि वर्ष 2023 का पहला उनकी रचना रेत से बनी लाल किला की तस्वीर दुनियां की सबसे बड़ी कलाकृति है, जिसका वजन 1 टन है और इसे बनाने में 20 घंटे का समय लगे। यह रेत कलाकृति सोशल मीडिया में खूब वायरल होने के साथ अखबारों व टीवी चैनलों पर भी काफी सुर्खियां भी बटोरी थी।

*कलाकृतियों से समाज को संदेश
बता दे कि यह युवा कलाकार मधुरेन्द्र रोड पर फेंके हुए कचरे से उत्पन्न दुष्प्रभाव व गुटखों के रैपर से अपनी कलाकृतियां बनाकर लोगों को नशीले चीजों के सेवन से बचने का संदेश देतें हैं, इतना ही नहीं ये बालू पर महापुरुषों की जयंती से लेकर श्रंद्धाजलि तक, देश-दुनिया की धरोहर और विरासतों की आकर्षक आकृति, देवी-देवताओं की प्रतिमा, मानव स्वाथ्य, नशा का दुष्प्रभाव, मधनिषेध, धूम्रपान निषेध, बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओ, नारी उत्पीड़न, मजबूर-बेबस, हिंसा, शोषण, बाल मजदूर, भ्रूण हत्या, जल संरक्षण, जल, वायु और मृदा प्रदूषण, पशु-पंछी संरक्षण, जनसंख्या नियंत्रण, प्रकृति आपदा व आतंकवाद आदि जैसे कुरीतियों तथा कई जवलंत विषयों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर समाज को नया संदेश देते हैं।

*मिला चुका हैं अवार्ड
अंतराष्ट्रीय रेतकला उत्सव विजेता सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र को अपनी कठिन परिश्रम के बदौलत लोकसभा चुनाव 2019 व विधानसभा आम चुनाव 2020 में निर्वाचन आयोग भारत सरकार का ब्राण्ड अम्बेसडर चुने गए। फिलहाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2022के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसके अलावे राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार जैसे इंटरनेशनल सैंड आर्ट फेस्टिवल अवार्ड, इंटरनेशनल चिल्ड्रेन फिल्म पुरस्कार, राष्ट्रपति सम्मान, भारत नेपाल मैत्री संबंध सम्मान, फ्रेंडशिप ऑफ इंडिया एंड अमेरिका सम्मान, वैश्विक शान्ति पुरस्कार, बिहार गौरव अवार्ड, विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला सम्मान, बिहार रत्न, ग्लोबल बिहार एक्सीलेंस अवार्ड, डॉ राजेन्द्र प्रसाद शिरोमानी सम्मान, शाहिद सम्मान, कला सम्राट सम्मान, आम्रपाली पुरस्कार, चम्पारण रत्न, वैशाली गणराज्य सम्मान, केसरिया महोत्सव सम्मान, बांका महोत्सव सम्मान, चम्पारण गौरव अवार्ड, बौद्ध महोत्सव सम्मान, वैशाली महोत्सव सम्मान, मिस्टर चम्पारण, राजगीर महोत्सव सम्मान, थावे महोत्सव सम्मान, राज्य स्तरीय युवा पुरस्कार, आईकॉन ऑफ चम्पारण, ग्लोबल पीस अम्बेसडर अवार्ड, मगध रत्न अवार्ड व युथ आईकॉन अवार्ड सहित सैकड़ों से ज्यादा पुरस्कार इनके झोली में हैं।

*कला का प्रदर्शन
सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने नेपाल के विश्वप्रसिद्ध गढ़ीमाई मेला, श्रीलंका, यूएसए, भूटान, रूस, जापान तथा थाईलैंड सहित शार्क देशों के साथ प्रतिनिधित्व कर प्रसिद्ध लोकआस्था के महान पर पर्व छठ-पूजा पर की कलाकृति बनाकर कर सभी विदेशी प्रतिभागियों के बीच अपनी कला का प्रदर्शन बिहार की सोंधी मिट्टी की खुशबू का एहसास करा दिया था। वही एशिया फेम सोनपुर मेला व सरकारी महोत्सव तथा देश-प्रदेश के विभिन्न सभी छोटे-बड़े शहरों मुंबई, महाराष्ट्र, दिल्ली, गाजियाबाद, पंजाब, भटिंडा, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, इलाहाबाद, पश्चिम बंगाल, ओड़िसा, किशनगंज, राजगीर, बोधगया, थावे तथा चम्पारण में भी अपनी कला प्रदर्शन कर चुके हैं।

*पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने की थी सराहना
देश पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भी 2012 में मधुरेन्द्र द्वारा बनायीं गयी विकसित देश भारत में विज्ञान के विकास का महत्व पर आधारित कलाकृति को देख प्रशंशा की थी। वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओड़िसा गवर्नर प्रो गणेशी लाल व ओडिशा के रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक सहित बड़े-बड़े राजनेताओं व वरीय प्रसाशनिक अधिकारियों तथा देश-विदेश के सैलानियों को भी अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं।

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